Saturday, June 13, 2020

आखिर किसी लड़की/लड़के को प्यार में धोखा व इंकार क्यों मिलता है? Hemant_Arya

-:करवा सच:-
#Q-आखिर किसी लड़की/लड़के को प्यार में धोखा व इंकार क्यों मिलता है?
#Ans-प्यार एक हार्मोनल प्रभाव है जो अपने पार्टनर के प्रति आकर्षण उत्पन्न करता है। जब हमारा मस्तिष्क ये समझ लेता है कि सामने वाला इंसान हमारे फ्यूचर लिए बेस्ट है तब हमें प्यार हो जाता है, साथ हीं जब किसी का मस्तिष्क ये समझ लेता है कि हम उसके लिए बेस्ट नहीं है तब हमें ब्रदर जॉन/सिस्टर जॉन, फ्रेंड जोन के साथ-साथ इंकार व धोखा का सामना करना पड़ता है। इसलिए प्यार की हिफाजत करना हो और लंबी उम्र तक संभालना हो तो आज इस व्यापार के दौर में आपको BMW बनकर रहना होगा अर्थात बेहतर बनकर रहना होगा। उदाहरण के तौर पर देखे तो आपके पास मारुति 800 है और आपके पड़ोसी के पास BMW है तो जाहिर सी बात है कि आप अपने मारुति 800 से ज्यादा पड़ोसी के BMW को देखेंगे और सोचेंगे की काश उसने एक बार बैठने का मौका मिल जाता। जो इंसान अपने पास मौजूद मारुति 800 में ही संतुष्ट हो जाता है उस इंसान की जिंदगी में शांति आ जाती है और उसकी जिंदगी खुशियों से भर जाती है। ये भी एक सच है कि लड़कियों के पास हमेशा अनजान लड़कों के कॉल, मैसेज इत्यादि आते रहते हैं। जाहिर सी बात है कि जिस प्रोडक्ट के ज्यादा कस्टमर होंगे उसके भाव तो बढ़ ही जायेंगे हैं और उन्ही कॉल्स, मैसेज और फ्रेंड्स जो प्यार में पड़ जाते हैं उनको 3 जोन में डिवाइड होना पड़ता है।
1-ब्रदर/सिस्टर जोन,
2-फ्रेंड जोन
2-बॉयफ्रेंड/गर्लफ्रेंड जोन
ब्रदर/सिस्टर जोन:-इसमें हमेशा वो लड़का/लड़की आयेंगे जो दिल का चाहे कितना भी अच्छा हो, लेकिन पैसा(For Boy) और पर्सनलिटी(Boys&Girls)में कमजोर हो। कभी-कभी उम्र और फिलिंग्स का दोष हो सकता है।
फ्रेंड जोन:-इसमें हमेशा वो लड़का/लड़की आयेंगे जो ब्रदर/सिस्टर जोन से थोड़ा बेहतर हो पर परफेक्ट नहीं जैसा कि उन्हें चाहिए।
बॉयफ्रेंड/गर्लफ्रेंड जोन-इसमें हमेशा वो लड़का/लड़की आयेंगे जिसके पास पैसा(Boys) और पर्सनलिटी(Boys&Girls) भरपूर मौजूद हो,चाहे वो दिल कितना भी गद्दार व झूठा हो और इसका सबसे बड़ा कारण होता है उनका फ्रेंड सर्किल..जहां उनको एक उचित प्रभाव डालना होता है और यही एक्सपेरिमेंट करने वाले लड़के/लड़कियां धोखा खाने के बाद हर जगह कहते फिरेंगे कि प्यार एक धोखा है। सच तो ये है कि तुमने प्यार को चुना ही नहीं था,उसे तो तुमने ब्रदर/सिस्टर जोन, फ्रेंड जोन में डाल रखा है। जिनको ये लगता है कि ये सच नहीं है,उन्हें एक और उदाहरण दे दूं। क्या कभी किसी लड़की के जुबान से ये सुना है कि मेरे सपनों का गरीब, मेरे सपनों का बेरोजगार आएगा..? हमेशा उनके जुबान पर एक ही बात होगी। मेरे सपनों का राजकुमार आएगा। वहीं लड़को के जुबान पर आयेगा-मेरे सपनों की राजकुमारी आएगी।
-:करवा है मगर सच है:-
प्यार करो,व्यापार नहीं फिर जिंदगी में कभी भी धोखा नहीं मिलेगा, क्योंकि हम उसे ढूंढते हैं जो हमारी आंखों को अच्छा लगता है, लेकिन भगवान हमें उससे मिलाता है जो हमारे जिंदगी के लिए अच्छा होता है।
#जो_तुम्हारे_पास्ट_को_स्वीकार_करेगा_सिर्फ_वही_तुमसे_ताउम्र_प्यार_करेगा।

Monday, April 27, 2020

क्या आप वास्तव में शादी के लिए तैयार है...?#हेमन्त_आर्या

शादी कब करनी चाहिए?
शादी सिर्फ शारीरिक जरूरतों को पूरा करने के लिए नहीं होता है,अपितु शादी इस सृष्टि के सिस्टम को बनाए रखने की भागीदारी को निभाने के लिए होनी चाहिए।कई लोगों के परिवार में एक सदस्य की छोटी सी नौकरी और सेल्फ डिपेंडेंट होने के बाद शादी का विचार आने लगता है,ये गलत है।शादी तब नहीं करनी चाहिए जब घर वाले और आपके रिश्तेदार आप पर तंज कस रहे हैं!शादी तब भी नहीं करनी चाहिए जब आपके सारे मित्र की शादी हो गई है और आप लेट हो रहे हैं!शादी के लिए मेंटली प्रिपेयर होना बहुत जरूरी होता हैं,क्योंकि शादी के बाद इंसान की जिंदगी का नया चैप्टर शुरू होता है।एक अनजान व्यक्ति जिसको आप बिल्कुल भी नहीं जानते हैं,उसके साथ एक नई दुनियां बसाने जा रहे हैं।हम सोच लेते हैं कि हमारे माता-पिता हमारे लिए अच्छा ही चुन रहे होंगे,ये बातें सही भी है कि वो अपने तरफ से गलत फैसला नहीं लेते हैं,फिर भी देखने को मिलता है कि शादी के बाद पति-पत्नी के बीच साल-दो साल बाद ताना-तानी शुरू हो चुका होता है।वजह यही है की पहली ही या दूसरी मुलाकात में कोई इंसान अपनी बुराइयां नहीं दिखाता है और हम पहली या दूसरी मुलाकात में ही एक-दूसरे को समझ लेने का बहम पाल लेते हैं।शादी के बाद एक-दूसरे की जिंदगी में कोई प्राइवेसी नहीं होनी चाहिए इसलिए भूतकाल में हुए घटनाओं का भी विश्लेषण कर लेना जरूरी होता हैं और यहीं से अतीत को भूलकर भविष्य की ओर अग्रसर हो जाना चाहिए।कुछ लड़के-लड़कियां अपनी अच्छाइयां दिखाकर शादी के लिए अपनेे पार्टनर से हाॅं करवा लेते हैं और साल-महिना बितते-बितते हकीकत सामने आ जाती है और रिश्ता ताश के पत्तों से बने महल की तरह धम से गिर पड़ता है।कैसी लगी पोस्ट कमेंट करके जरूर बताइए।
 #हेमन्त_आर्या 

Sunday, April 26, 2020

वो इंसान बुरा नहीं था,बस आपकी अच्छाइयों को वो देख नहीं पाया इसलिए आपसे दूर हो गया।#हेमन्त_आर्या

#Motivation_Of_The_Day
#Diary_2
जिसे हम प्यार करते हैं उसे हम रिस्पेक्ट देते हैं,जो हमसे प्यार करती हैं,वो हमें रिस्पेक्ट देती है।ये हक़ीक़त है,लेकिन हालात खुद पर बने तब समझना मुश्किल है।सूर्यवंशम फिल्म के दो दृश्य आपके सामने है।पहले दृश्य में शहर में पढ़ी-लिखी एक साधारण सी लड़की गौरी हीरा ठाकुर को अनपढ़ गंवार कहकर ठुकरा रही है और दूसरे दृश्य में राधा जोकि स्वयं IAS की तैयारी कर रही है,उसी अनपढ़-गवार हीरा ठाकुर को अपना रही है।एक हीरा ठाकुर को ठुकरा रही है और दूसरी हीरा ठाकुर को अपना रही ऐसा क्यों?नज़रिया का फर्क होता है कि हम किस इंसान को किस दृष्टिकोण से देख रहे हैं,ये हमारे नजरों पर निर्भर करता है।अच्छे नजरिया से देखने पर इंसान में अच्छाईयां दिखाई देती है और बुरी नजर से देखने पर बुराईयां नजर आती है और हमारे साथ जो कुछ भी होता है यकीन मानिए उसका परिणाम भी सकारात्मक व अच्छा होता है क्योंकि हम उससे मिलते हैं जो हमें बेस्ट लगता है लेकिन ईश्वर हमें उससे मिलाता है जो हमारे लिए बेस्ट होता है।गौरी भी गलत नहीं थी,बस वो हीरा ठाकुर के अच्छाइयों को पहचान नहीं पाई।खैर ये तो फिल्मी बातें हैं,लेकिन वास्तविकता थोड़ी अलग होती है।आइए एक छोटी सी कहानी सुनते हैं।लोहे की दुकान में एक दराज में कील और दुसरे में मशीनरी पार्ट्स रखा हुआ था।दोनों का मेटेरियल एक था लोहा,लेकिन दुकानदार उन्हे अलग-अलग कीमतों में बेच रहा था.इस कारण कील और मशीनरी पार्ट्स के बीच ताना-तानी हुआ तब बीच बचाव करते हुए दुकानदार उन दोनों को समझाया और बोला-जो मुश्किल दौर से गुजर कर खुद को निखारता है उसकी कीमत ज्यादा होती है।अर्थात आज के वक्त में इंसान से ज्यादा उसकी दौलत और सफलता की इज्जत होती है।इंसान पत्थर खोने से नहीं बल्कि हीरा को खोने से डरता है,अगर तुम चाहते हो कि लोग तुम्हें भी प्यार करें,खोने से डरे है तो बेशक तुम्हें खुद को तराश कर हीरा बनाना होगा।
#हेमन्त_आर्या

Saturday, April 25, 2020

दिल पर चोट लगी है,तो अब क्या करें..?#हेमन्त_आर्या

प्यार एक खुबसरत एहसाह है,जो इंसानों को जीना सिखाता है।जीवन में हर किसी को कभी ना कभी प्यार हो ही जाता है।अगर मिल गई तो दवा बनकर आयु को लम्बी कर देती है और ना मिली तो जहर बनकर आयु को ही खा जाती है।कई बार दर्द सहने तक की नौबत आ पड़ती है और दूसरो के दर्द को वहीं समझ सकता है जो ऐसी हालातो से गुजर चुका होता है।कई बार प्यार का परवान और पागलपन ऐसा चढ़ता है की दुनियां की पूरी ताकत एक तरफ और दो प्रेमी की ताकत एक तरह, फिर भी जुदा नहीं हो पाते है,क्योंकि उनका प्यार स्वार्थों से नहीं इमोशन से जुड़ा होता है।कुछ लोग इसका गलत इस्तेमाल भी करते है।ये तो हमें अपने संस्कारों से मिलता है।प्यार में दर्द भी सहना पड़ता है,वहीं कुछ लड़के-लड़कियां मेंटली डिस्टर्ब भी हो जाते है।तकलीफ तो बहुत होता है लेकिन हकीकत को एक्सेप्ट करना ही पड़ता है।अगर जुदाई की नौबत आए तो खुद को कैसे नॉर्मल करे,बस इसी बात पर आर्टिकल लिख रहा हूं।इंसान दो तरह के होते है।पहला-जो आपको आसमान से सड़क तक का रास्ता दिखाता है,ऐसे लोगो को भूलने के लिए महज 21 दिन या किसी और का साथ काफी होता है,वहीं दूसरा जो सड़क से उठाकर आसमान तक का रास्ता दिखा दे,ऐसे लोगो को भूलना बहुत मुश्किल है या शायद नामुमकिन भी है।लेकिन फिर भी नौबत जुदा होने की आ पड़ी है तो क्या करे...?इसके लिए एक छोटी सी कहानी समझता हूं,किसी दिन आपको बुखार लगती है तो आप बुखार की दवा लेते हैं।2-4 दिन बाद आप ठीक हो जाते है,फिर उस दवा को संभालकर अपने पास रख लेते है या पड़ोसी बीमार पड़े तो उसको दे देते है।मतलब साफ है,आप उस इंसान को बुखार की दवा के जगह पर रखकर देखिए।आप अब सही मार्ग पर आ चुके है।अब उसके गुणों की जरूरत किसी और को है क्योंकि दुनियां में आपके तरह बहुत लोग बीमार है,इसीलए भगवान आपसे उसको अलग कर रहा है।उसे रोकिए मत,जाने दीजिए ताकि कोई और भी ठीक हो सके।कहना बहुत आसान है,मैं मानता हूं लेकिन हकीकत को एक्सेप्ट करना पड़ता है,यही जीवन की सच्चाई है।

              हेमन्त_आर्या

Monday, April 20, 2020

विदेशों में काम करने वाले भारतीय कितना सही और कितना गलत है?टिक-टॉक पर वीडियो हो रहा है वायरल।#हेमन्त_आर्या

गरीबी का हवाला देकर सरकार को घेरने की कला काफी पुरानी हो चुकी है।कई लोग सोशल साइट पर तंज कस रहे हैं की विदेशों में कमाने वाले लोग कोरोना लाए हैं और यहां पर काम करने वाले लोगों को सजा मिल रही है।मैं आपकी बात और व्यक्तिगत विचार से काफी हद तक सहमत हूं,लेकिन क्या आप मानते हैं की पूरा हिंदुस्तान पृथ्वी लोक से अलग-थलग है और ये हिंदुस्तान सिर्फ यहीं पर काम करने वालों का है..?याद रखिए कि इस पृथ्वी लोक का आप सिर्फ एक किरायेदार हैं, मालिक नहीं है।
                  अंतर्राष्ट्रीय बाजार नाम की भी कोई चीज होती है।अगर विदेशों से हमारे संबंध खत्म हो जाएगा तो सोचिए पेट्रोलियम कहां से आएगा और अगर वो शख्स विदेश में जाकर कमा रहा है तो आखिर कमाकर अपने देश में ही तो ला रहा है।जैसे आप दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु कमाने जाते हो और कमाकर पैसा अपने घर ले जाते हो।खैर,तेज बोलकर खुद को समझदार साबित करने की कला भी सिर्फ मुर्खो की पहचान है।जिसके पास जितना मस्तिष्क होगा वो उतना ही अंत: प्रभाव डालेगा।अंतरर्राष्ट्रीय बाजार नाम की भी कोई चीज होती है,ये भी आपको समझना चाहिए।ऐसे हालात में पछ और विपक्ष की भूमिका ना निभाकर एक हिंदुस्तानी की भांति सरकार के साथ चलना चाहिए बाकी जिंदा रहेंगे तो पछ और विपक्ष की भूमिका निभाते रहेंगे।याद रखिए कोरोना मुद्दा इतना छोटा भी नहीं है जितना हम समझ रहे हैं।क्या लाॅकडाउन होने से सरकार को नुकसान नहीं है..?आधे से ज्यादा कर्मचारी बैठकर तनख्वाह उठा रहे हैं, जबकि रेलवे, मॉल, फैक्ट्रियां सारे व्यापार ठप पड़ चुका है।
                     आपको भूख बर्दाश्त नहीं हो रही है और कई लोग भूख को रोककर बॉर्डर पर इस हालात में भी ड्यूटी कर रहे हैं,मुंह में तौलिया बांध-बांधकर ट्रेन परिचालन को अभी भी सार्थक बनाए हुए,पुलिस प्रशासन रात दिन मेहनत कर रही है।क्या उनका कोई परिवार नहीं है?डॉक्टर और सफाई कर्मी काम करते-करते ग्रसित हो जा रहे हैं और उनकी मौत तक हो जा रही हैं,क्या वो बलिदान नहीं दे रहे हैं?आपके साथ-साथ आपके परिवार और पूरे देश का भलाई इसी में है कि आप जहां है,वहीं रूके रहे।अच्छे दिन को देखने के लिए बुरे दिनों से गुजरना पड़ता है और अंत में एक देश का नागरिक होने के नाते हम सभी का ये फर्ज बनता है अपने आस पास के गरीब लोगों की मदद करें।
                  हेमन्त_आर्या