Sunday, April 26, 2020

वो इंसान बुरा नहीं था,बस आपकी अच्छाइयों को वो देख नहीं पाया इसलिए आपसे दूर हो गया।#हेमन्त_आर्या

#Motivation_Of_The_Day
#Diary_2
जिसे हम प्यार करते हैं उसे हम रिस्पेक्ट देते हैं,जो हमसे प्यार करती हैं,वो हमें रिस्पेक्ट देती है।ये हक़ीक़त है,लेकिन हालात खुद पर बने तब समझना मुश्किल है।सूर्यवंशम फिल्म के दो दृश्य आपके सामने है।पहले दृश्य में शहर में पढ़ी-लिखी एक साधारण सी लड़की गौरी हीरा ठाकुर को अनपढ़ गंवार कहकर ठुकरा रही है और दूसरे दृश्य में राधा जोकि स्वयं IAS की तैयारी कर रही है,उसी अनपढ़-गवार हीरा ठाकुर को अपना रही है।एक हीरा ठाकुर को ठुकरा रही है और दूसरी हीरा ठाकुर को अपना रही ऐसा क्यों?नज़रिया का फर्क होता है कि हम किस इंसान को किस दृष्टिकोण से देख रहे हैं,ये हमारे नजरों पर निर्भर करता है।अच्छे नजरिया से देखने पर इंसान में अच्छाईयां दिखाई देती है और बुरी नजर से देखने पर बुराईयां नजर आती है और हमारे साथ जो कुछ भी होता है यकीन मानिए उसका परिणाम भी सकारात्मक व अच्छा होता है क्योंकि हम उससे मिलते हैं जो हमें बेस्ट लगता है लेकिन ईश्वर हमें उससे मिलाता है जो हमारे लिए बेस्ट होता है।गौरी भी गलत नहीं थी,बस वो हीरा ठाकुर के अच्छाइयों को पहचान नहीं पाई।खैर ये तो फिल्मी बातें हैं,लेकिन वास्तविकता थोड़ी अलग होती है।आइए एक छोटी सी कहानी सुनते हैं।लोहे की दुकान में एक दराज में कील और दुसरे में मशीनरी पार्ट्स रखा हुआ था।दोनों का मेटेरियल एक था लोहा,लेकिन दुकानदार उन्हे अलग-अलग कीमतों में बेच रहा था.इस कारण कील और मशीनरी पार्ट्स के बीच ताना-तानी हुआ तब बीच बचाव करते हुए दुकानदार उन दोनों को समझाया और बोला-जो मुश्किल दौर से गुजर कर खुद को निखारता है उसकी कीमत ज्यादा होती है।अर्थात आज के वक्त में इंसान से ज्यादा उसकी दौलत और सफलता की इज्जत होती है।इंसान पत्थर खोने से नहीं बल्कि हीरा को खोने से डरता है,अगर तुम चाहते हो कि लोग तुम्हें भी प्यार करें,खोने से डरे है तो बेशक तुम्हें खुद को तराश कर हीरा बनाना होगा।
#हेमन्त_आर्या

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