दिल पर चोट लगी है,तो अब क्या करें..?#हेमन्त_आर्या
प्यार एक खुबसरत एहसाह है,जो इंसानों को जीना सिखाता है।जीवन में हर किसी को कभी ना कभी प्यार हो ही जाता है।अगर मिल गई तो दवा बनकर आयु को लम्बी कर देती है और ना मिली तो जहर बनकर आयु को ही खा जाती है।कई बार दर्द सहने तक की नौबत आ पड़ती है और दूसरो के दर्द को वहीं समझ सकता है जो ऐसी हालातो से गुजर चुका होता है।कई बार प्यार का परवान और पागलपन ऐसा चढ़ता है की दुनियां की पूरी ताकत एक तरफ और दो प्रेमी की ताकत एक तरह, फिर भी जुदा नहीं हो पाते है,क्योंकि उनका प्यार स्वार्थों से नहीं इमोशन से जुड़ा होता है।कुछ लोग इसका गलत इस्तेमाल भी करते है।ये तो हमें अपने संस्कारों से मिलता है।प्यार में दर्द भी सहना पड़ता है,वहीं कुछ लड़के-लड़कियां मेंटली डिस्टर्ब भी हो जाते है।तकलीफ तो बहुत होता है लेकिन हकीकत को एक्सेप्ट करना ही पड़ता है।अगर जुदाई की नौबत आए तो खुद को कैसे नॉर्मल करे,बस इसी बात पर आर्टिकल लिख रहा हूं।इंसान दो तरह के होते है।पहला-जो आपको आसमान से सड़क तक का रास्ता दिखाता है,ऐसे लोगो को भूलने के लिए महज 21 दिन या किसी और का साथ काफी होता है,वहीं दूसरा जो सड़क से उठाकर आसमान तक का रास्ता दिखा दे,ऐसे लोगो को भूलना बहुत मुश्किल है या शायद नामुमकिन भी है।लेकिन फिर भी नौबत जुदा होने की आ पड़ी है तो क्या करे...?इसके लिए एक छोटी सी कहानी समझता हूं,किसी दिन आपको बुखार लगती है तो आप बुखार की दवा लेते हैं।2-4 दिन बाद आप ठीक हो जाते है,फिर उस दवा को संभालकर अपने पास रख लेते है या पड़ोसी बीमार पड़े तो उसको दे देते है।मतलब साफ है,आप उस इंसान को बुखार की दवा के जगह पर रखकर देखिए।आप अब सही मार्ग पर आ चुके है।अब उसके गुणों की जरूरत किसी और को है क्योंकि दुनियां में आपके तरह बहुत लोग बीमार है,इसीलए भगवान आपसे उसको अलग कर रहा है।उसे रोकिए मत,जाने दीजिए ताकि कोई और भी ठीक हो सके।कहना बहुत आसान है,मैं मानता हूं लेकिन हकीकत को एक्सेप्ट करना पड़ता है,यही जीवन की सच्चाई है।
हेमन्त_आर्या
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